फैज़ अहमद फैज़ की बेटी मुनीज़ा हाशमी दिल्ली से ‘ निर्वासित ’ वतन वापस लौटाई गयीं

मीडिया जगत की नामचीन हस्ती और कार्यकर्ता

Update: 2018-05-13 14:44 GMT

इसका कोई क्या मतलब निकाले जब एक सरकार पड़ोसी मुल्क की सरकार के प्रति अपनी रंजिश का नजला मुनीज़ा हाशमी, जो कि मशहूर शायर फैज़ अहमद फैज़ की बेटी हैं, जैसी नामीचीन शख्सियत पर गिराये, उन्हें दिल्ली में एक सम्मेलन में शामिल होने से रोके, यहां तक कि उन्हें सम्मेलन – स्थल पर अपना नाम पंजीकृत कराने या होटल में रुकने से वंचित करे और फिर उन्हें अपने वतन वापस भेज दे मानो वो कोई अपराधी हों? एक लोकतंत्र के लिए यह कितना मुफ़ीद होगा जब एक सरकार उस शख्स पर कार्रवाई करने को आमादा हो जाये जो खुद हमेशा जम्हूरियत, लोगों के अधिकारों और न्याय के पक्ष में आवाज़ बुलंद करता रहा हो?

टेलीविज़न और मीडिया जगत की मशहूर हस्ती मुनीज़ा हाशमी नयी दिल्ली में 10 मई से 12 मई तक चलनेवाली 15 वीं एशिया मीडिया समिट में एक वक्ता के तौर पर आमंत्रित थीं. सूत्रों के मुताबिक, सम्मेलन की पूर्व संध्या पर भारत सरकार द्वारा आयोजकों को बताया गया कि मुनीज़ा हाशमी को न तो इस सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित होटल में ठहरना चाहिए और न ही उन्हें सम्मेलन के लिए अपना नाम पंजीकृत कराना चाहिए. आयोजकों को यह भी बताया गया कि नयी दिल्ली द्वारा उन्हें इस सम्मेलन में बोलने की अनुमति नहीं है. इसके बाद आयोजकों द्वारा उन्हें एक अन्य होटल में ठहराया गया. आयोजकों ने इस असुविधा के लिए उनसे लगातार माफ़ी मांगी. और अगली सुबह वो पाकिस्तान लौट गयीं. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इस सम्मेलन के आयोजकों में से एक था. टीवी 18 ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा इस पूरे प्रकरण से अनभिज्ञता जाहिर करने की ख़बर दी है.

गौरतलब है कि मुनीज़ा हाशमी और फैज़ फाउंडेशन, दोनों, ने असहज कर देने वाली इस घटना पर चुप्पी साध ली है क्योंकि वे नहीं चाहते कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते और ज्यादा बिगड़ें. हाशमी ने अपने भारतीय दोस्तों से मुलाकात जरुर की, लेकिन उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि वो इस मसले पर कुछ नहीं बोलने जा रहीं और चुपचाप पाकिस्तान लौट जाना पसंद करेंगी. हालांकि मीडिया के कई हिस्सों में यह ख़बर पहुंच ही गयी और सूत्रों की मानें तो मुनीज़ा को भी यह अहसास हो गया है कि इस मामले को अब ढंकना संभव नहीं. मुनीज़ा भारत और पाकिस्तान के बीच शांति, सौहार्द और सहयोग के लिए प्रतिबद्ध रही हैं और दोनों देशों में उनका काफी सम्मान है.

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को एक ट्वीटर संदेश में मुनीज़ा के बेटे अली हाशमी ने लिखा, “यही है आपका चमकता भारत? मेरी 72 वर्षीया मां को आधिकारिक रूप से आमंत्रित करने के बाद एक सम्मेलन में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गयी. शर्मनाक!”



उन्होंने इस घटना की पुष्टि करने वाली ख़बर का लिंक भी दिया. उन्होंने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि इस सम्मेलन का आयोजन करने वाला सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस पूरे मामले से अनभिज्ञता जाहिर किया है.

एक अन्य ट्वीटर संदेश में अली हाशमी ने भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी के साथ फैज़ अहमद फैज़ की एक तस्वीर साझा की.



आपसी रंजिश के बढ़ते माहौल में भारत और पाकिस्तान, दोनों, ने अमन पसंद विद्वानों एवं कार्यकर्ताओं को वीसा देना बंद किया हुआ है. मुनीज़ा हाशमी के पास भारत के लिए लंबी अवधि का वीसा था. लिहाज़ा वो सामान्य घंटी बजाये बगैर यहां आ गयीं. लेकिन उनकी यहां मौजूदगी की एकबार पक्की ख़बर मिलते ही सरकार उन्हें वापस भेजने में जुट गयी.

मुनीज़ा हाशमी हमेशा अपने देश में फ़ौज के शासन के खिलाफ रही हैं. वो शांति की एक मजबूत समर्थक और अपने पिता फैज़ अहमद फैज़ की विरासत को बढ़ाने में आगे रही हैं. वो पाकिस्तानी टेलीविज़न की दुनिया में आनेवाली पहली महिला रही हैं और मीडिया में उच्च पदों पर महिलाओं की भागेदारी के पक्ष में लगातार आवाज़ बुलंद करती रही हैं. वो पाकिस्तान में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करने में आगे रही हैं.

अब जबकि वो अपने अनादर के बारे में बोलने या वापस अपने मुल्क पाकिस्तान में इसे एक मुद्दा बनाने के पक्ष में नहीं हैं, उनका मानना है कि इस किस्म के मसलों को दोनों मुल्कों के बीच अमन और दोस्ती के आड़े नहीं आने देना चाहिए. गौरतलब है कि उनका जन्म शिमला में हुआ था. यह भारत के अमनपसंद लोगों के लिए शर्म की बात है कि लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों और शांति के पक्ष में आवाज़ बुलंद करने वाली एक शख्सियत के साथ उनके दिल्ली दौरे के दौरान शर्मनाक व्यवहार किया गया.

एशिया मीडिया समिट का आयोजन एशिया – पसिफ़िक इंस्टिट्यूट फॉर ब्राडकास्टिंग डेवलपमेंट (एआईबीडी) द्वारा किया जाता है. इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में दुनिया भर से प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाता है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इसकी मेजबानी कर रहा था. जैसाकि एक वरिष्ठ भारतीय कार्यकर्ता ने चिंता जतायी, “इस सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधि अपने मेजबान के बारे में क्या सोचेंगे?” पाकिस्तान की मीडिया की एक नामचीन हस्ती होने के नाते मुनीज़ा हाशमी ऐसे सम्मेलनों बराबर भाग लेती रही हैं.

मुनीज़ा हाशमी ने अपने एक दोस्त को एक संक्षिप्त संदेश में लिखा है:

“समर्थन के लिए आपका और अन्य दोस्तों का शुक्रिया. मैं इस मसले से निपटने का निर्णय आप पर छोड़ती हूं. हम फैज़ परिवार और फैज़ फाउंडेशन के सदस्य दोनों मुल्कों के बीच अमन के लिए काम करते रहेंगे. जैसाकि फैज़ कहते थे – लंबी है गम की शाम मगर, शाम ही तो है.”

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