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द सिटिज़न ब्यूरो | 11 MARCH, 2019

“क्या भारत में मुसलमान होना एक अपराध है?”

मेरठ की एक झुग्गी बस्ती में 200 मकान आग में खाक, महिलाओं ने पुलिस पर लगाये आरोप


उत्तर प्रदेश पुलिस ने कथित रूप से एक मुस्लिम बस्ती पर हमला किया, घरों में आगजनी की, पुरुषों के साथ मारपीट की, महिलाओं से बदसलूकी की, गोलियां चलायी और बस्ती के भयभीत निवासियों पर हमला किया. अपने हाल पर छोड़ दिये गये बस्ती के इन भयभीत निवासियों का नकद और सामान समेत अपनी गाढ़ी कमाई में से थोड़ा बहुत जो कुछ भी बचाया हुआ था वो सब नष्ट हो गया. उस पूरे इलाके में अराजकता का माहौल है और पुलिस का दावा है कि वह एक नियमित अतिक्रमण हटाओ अभियान था जिसका बस्ती वाले का विरोध कर रहे थे. जबकि स्थानीय लोग पुलिस के इस दावे से इंकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि पुलिस का उक्त हमला प्रदेश में चल रहे सांप्रदायिक अभियान का एक हिस्सा था जिसमंा उनके घरों को जला दिया गया और उस बस्ती के निवासियों पर हमला किया गया.

इस घटना के बाद चलचित्र अभियान नामक संगठन ने घटनास्थल का एक वीडियो बनाया है, जिसे द सिटिज़न ने नीचे लगाया है. उस संगठन ने अपने बारे में जैसा बताया :

चलचित्र अभियान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फिल्म और मीडिया पर काम करने वाला एक समूह है.

यह समूह वृत्तचित्र, वीडियो फिल्मों, समाचार फीचरों, साक्षात्कार और लाइव प्रसारण जैसे वीडियो प्रारूपों की एक श्रृंखला का निर्माण करता है. हम हाशिए के विभिन्न समुदायों से जुड़े विभिन्न स्थानीय मुद्दों को उनकी अपनी आवाज़ में सामने लाने की कोशिश करते हैं. कॉरपोरेट नियंत्रण की वजह से मुख्यधारा की मीडिया द्वारा अक्सर सतही मुद्दों को खूब उछाला जाता है और राजनीतिक दलों या जाति, वर्ग, धार्मिक और लैंगिक पक्षपात के मुद्दों का गला घोंट दिया जाता है.

चलचित्र अभियान के प्रयासों का सबसे अहम हिस्सा स्थानीय समुदाय के लोगों को वीडियो के जरिए अपनी कहानी कहने के लिए प्रशिक्षित करना है. ये कहानियां नियमित रूप से सांप्रदायिक आधार पर समुदायों को बांटने वाले हथकंडों का एक जवाबी चुनौती के तौर पर उभार रही हैं. हम विभिन्न सामाजिक – राजनीतिक मुद्दों से जुड़े फिल्मों को लोगों के सामने प्रदर्शित भी करते हैं. ऐसी फिल्मों – वृतचित्र और फीचर फिल्म - का एक पूरा खजाना भरा पड़ा है लेकिन वे एक सीमित दायरे तक ही सिमटी हुई हैं. चलचित्र अभियान ऐसे प्रयासों के माध्यम से एक वृहत प्रगतिशील सांस्कृतिक आंदोलन में अपना योगदान देना चाहता है.

हम खुद को एक मीडिया संगठन के तौर पर सीमित नहीं रखना चाहते बल्कि फिल्म और संस्कृति से जुड़े एक संगठन के तौर पर भी उभारना चाहते हैं. हमारे लिए, “प्रति संस्कृति ही जन संस्कृति है”.


 

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