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द सिटिज़न ब्यूरो | 6 JUNE, 2019

हार के बाद बड़ी जीत

राजस्थान की राजनीति में कैलाश चौधरी और महादेव सिंह खंडेला की कहानी


राजस्थान के बाडमेर जिले की बायतू विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार कैलाश चौधरी 2018 का चुनाव हार गये थे. लेकिन चार महीने बाद हुए 2019 के लोकसभा चुनाव मे भाजपा ने उन्हें बाडमेर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बना दिया. राज्य में भाजपा की हुई प्रचंड जीत की बदौलत वो भी चुनाव जीतकर सांसद बन गये. बात यहीं तक ही सीमित नहीं रही. उन्हें नरेन्द्र मोदी मंत्रीमंडल में भी शामिल किया गया. वे फ़िलहाल केंद्र सरकार में कृषि राज्य मंत्री हैं.

कैलाश चौधरी जैसी ही कहानी महादेव सिह खण्डेला की रही. वर्ष 2008 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में वे सीकर जिले की खण्डेला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े और चुनाव हार गये. लेकिन विधानसभा चुनाव हारने के बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में महादेव सिंह को कांग्रेस ने सीकर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया. वे चुनाव जीतकर संसद पहुंच गये. इसके बाद जब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की दोबारा सरकार बनी, तो महादेव सिंह खण्डेला को उस सरकार मे मंत्री बना दिया गया.

अजीब संयोग है कि कैलाश चौधरी व महादेव सिंह, दोनों जाट बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं. और दोनों को ही क्रमशः भाजपा और कांग्रेस की तरफ से पहली दफा सांसद बनते ही केंद्र मे मंत्री बनने का अवसर मिला. दोनों ही पहले विधायक रहे और विधायक रहते चुनाव हारने के बाद उन्हें लोकसभा चुनाव में अवसर दिया गया. लोकसभा का टिकट मिलते ही दोनों पहली मर्तबा

सांसद व केन्द्रीय मंत्री बन गये. जबकि दोनों ही राजस्थान के किसी भी मंत्रिमंडल के सदस्य तक नही रहे.

राजस्थान में लोगों के बीच चर्चा है कि राजनीति में हार कब जीत में बदल जायेगी कोई नहीं जानता. कैलाश चौधरी व महादेव सिह खण्डेला का उत्थान इसका बढ़िया उदहारण है.

(इनपुट : अशफाक कायमखानी)
 

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