कश्मीर घाटी में तनावपूर्ण स्थिति के बीच जम्मू – कश्मीर में पांच चरणों में होने वाले लोकसभा चुनाव की शुरुआत 11 अप्रैल को होगी. पहले चरण में चुनावी मैदान में जोर आजमाने वालों में राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्री – डॉ. फारूक अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती – शामिल हैं.

घाटी में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था की चिंताओं की वजह से लोकसभा उम्मीदवारों की सांसें फूली होने और चुनाव प्रचार – अभियान में कोई तड़कभड़क नहीं होने के बावजूद इस सीमावर्ती राज्य में राजनीतिक माहौल गर्म चुका है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “चुनावी दौड़ में उतरने वाले राजनीतिक दलों एवं उम्मीदवारों को रोड – शो से बचने को कहा गया है. हमें इस बात की सूचना मिली है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया में व्यवधान डालने की नीयत से आतंकवादियों द्वारा चुनावी सभाओं को निशाना बनाया जा सकता है.”

इस बीच, आतंकवादी हमले के खतरों के बावजूद घाटी में चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है. राज्य का विशेष दर्जा, अलगावादियों एवं उनके समर्थकों पर चल रहे दमनकारी अभियान, पिछले तीन वर्षों में हुए निरंतर खून – खराबा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा का भय और राज्य के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने वाली हिंदुत्व की विचारधारा जैसे मुद्दे प्रचार अभियान में छाये हुए हैं.

संसद के निचले सदन में इस राज्य से छह प्रतिनिधि भेजे जाते हैं. वर्ष 2014 के चुनावों में, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने कश्मीर घाटी की तीन सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि जम्मू क्षेत्र की दो सीटों और लद्दाख की एक सीट पर भाजपा जीती थी. इसके बाद हुए विधानसभा के चुनावों में इन दोनों पार्टियों ने अधिकांश सीटें जीती थी और मिलकर एक अलोकप्रिय सरकार बनाया था, जिसका पिछले साल अंत हो गया.

श्री अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती के अलावा चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रमुख चेहरों में बारामूला संसदीय सीट से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की टिकट पर लड़ रहे पूर्व यूनियन नेता कयूम वानी शामिल हैं. उनके सामने सज्जाद लोन के नेतृत्व वाले पीपुल्स कांफ्रेंस के उम्मीदवार रजा एजाज़ और नेशनल कांफ्रेंस के अकबर लोन हैं. श्री एजाज़ एक भूतपूर्व पुलिस अधिकारी हैं. चुनाव के पहले चरण में बारामूला और जम्मू संसदीय क्षेत्र में 11 अप्रैल को वोट डाले जायेंगे.

राजनीतिक प्रेक्षकों ने श्रीनगर से फारूक अब्दुल्लाह के दुबारा जीतने की संभावना जतायी है क्योंकि पीडीपी और पीपुल्स कांफ्रेंस ने शिया समुदाय से अपेक्षाकृत कमजोर उम्मीदवार खड़े किये हैं जोकि एक – दूसरे के वोट खायेंगे. इस अति महत्वपूर्ण सीट पर भाजपा के उम्मीदवार खालिद जहांगीर से उतरने से राजनीतिक समीकरणों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा.

उधमपुर के साथ श्रीनगर संसदीय सीट पर चुनाव के दूसरे चरण में 18 अप्रैल को वोट डाले जायेंगे. उधमपुर सीट से प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री डॉ जीतेंद्र सिंह दुबारा चुनाव लड़ेंगे.

दक्षिण कश्मीर के अति संवेदनशील संसदीय क्षेत्र अनंतनाग में सुरक्षा कारणों से तीन चरणों में वोट डाले जायेंगे. इस सीट पर नेशनल कांफ्रेंस में हाल में शामिल हुए भूतपूर्व न्यायधीश न्यायमूर्ति हसनैन मसूदी की सीधी टक्कर महबूबा मुफ़्ती से होगी. कांग्रेस पार्टी ने अबतक इस सीट से किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के चुनावी अखाड़े में उतरने पर महबूबा मुफ़्ती की राह मुश्किल हो जायेगी.

अनंतनाग में तीन चरणों में 23 अप्रैल, 29 अप्रैल और 6 मई को वोट डाले जायेंगे. लद्दाख संसदीय क्षेत्र में भी 6 मई को मतदान होगा.

सुरक्षा की अनिश्चित स्थिति के मद्देनजर अधिकारियों को मतदान का प्रतिशित कम रहने का अनुमान है. दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में संदिग्ध आतंकवादियों ने कल एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी. इस साल इस किस्म की यह चौथी घटना है. एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि चुनाव की तारीख नजदीक आने पर स्थिति और बिगड़ने की आशंका है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “शांतिपूर्ण चुनाव कराने और शरारती तत्वों को चुनावी प्रक्रिया में व्यवधान डालने का मौका नहीं देने के लिए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किये जायेंगे. अकेले बारामूला संसदीय क्षेत्र में किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बलों की 400 से अधिक कंपनियां तैनात की जायेंगी.”